सोमवार, 2 अप्रैल 2018

जानें क्‍या है एस सी एवं एस टी निरोधक अधिनियम 1989 - What is SC ST Prevention Act 1989 in Hindi


दोस्‍तो आज हम अपने इस पोस्‍ट में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति निरोधक अधिनियम 1989 (What is SC ST Prevention Act 1989 in Hindi) के बारे में जानकारी प्राप्‍त करेंगे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम (SC ST Prevention Act) को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की सरकार ने 11 सितम्बर वर्ष 1989 को संसद में पेश किया था उस समय कांग्रेस के पास भारी बहुमत था इसलिए यह बिल उसी दिन पारित हो गया था तो आइये दोस्‍तो इस अध्‍ािनियम में और अधिक जानते हैै -

What is SC ST Prevention Act 1989 in Hindi

जानें क्‍या है एस सी एवं एस टी निरोधक अधिनियम 1989 - What is SC ST Prevention Act 1989 in Hindi

  1. SC ST बिल पर 30 जनवरी, 1990 को राष्ट्रपति ने मुहर लगा दी और इसके बाद यह अधिनियम जम्मू कश्मीर को छोड़ कर पुरे भारत में लागु हो गया
  2. यह जरूरी नही कि SC ST Act, SC ST के लोगों पर ही लागू होता है यह नियम उन सभी लोगो पर लागु होता है जो SC ST से belong नहीं करते है
  3. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम (SC ST Prevention Act) में 5 अध्याय और 23 धाराएँ है
  4.  अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम (SC ST Prevention Act) के अनुसार यदि कोई गैर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति sc st के व्यक्ति के खिलाफ निम्न मे से यदि कोई भी अपराध करता है जैसे - 
  • SC ST के व्यक्ति के साथ व्यापार करने से इंकार करता है
  • SC ST के व्यक्ति को नौकरी देने से इंकार करना
  • उन्हें किसी सार्वजनिक जगह पर जाने से रोकना
  • SC ST के व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार करना
  • SC ST के व्यक्ति के साथ मारपीट करना या परिवार के सामने अपमानित करना
  • SC ST के लोगो को जबरन घर से निकालना या घर छोड़ने के लिए मजबूर करना
  • SC ST के व्यक्ति के खिलाफ झूठा आरोप लगाना
  • SC ST की महिला को अपमानित करना या उसका यौन शोषण करना
  • SC ST के व्यक्ति को किसी विशेष व्यक्ति को वोट देने के लिए मजबूर करना
  • SC ST के व्यक्ति की भूमि पर जबरन कब्जा करना
नोट - ऐसा करने पर SC ST Act, 1989 लागु होता है इस एक्‍ट के अनुसार निम्‍न तरह की सजा का प्रावधान है - 
  • यदि किसी व्यक्ति पर इस एक्ट के तहत केस दर्ज होता है तो उसकी तुरंत गिरफ्तारी की जाती है और उसे अग्रिम जमानत भी नहीं मिलती है
  • पकडे जाने के बाद भी व्यक्ति को केवल High Court ही जमानत दे सकता है
  • SC ST Act के मामलो की सुनवाई एक विशेष अदालत करती है जो SC ST Act की धारा 14 के तहत बनाई गयी है.
  • SC ST Act में व्यक्ति को IPC की सजा के अतिरिक्त SC ST Act के तहत 6 महीने से लेकर उम्रकैद की सजा हो सकती है
  • यदि केस किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ है तो उसे तब ही दर्ज किया जा सकता है जब वो जाँच में दोषी पाया जाता है
  • इसके विपरीत SC ST Act के तहत सजा होती है SC ST Act के तहत तुरंत गिरफ्तारी होती है और जमानत भी नहीं मिलती ले‍किन इस कारण से कुछ लोग इसका दुरूपयोग भी करने लगे है 
(National Crime Records Bureau) नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट की मुताबिक 2016 में कुल 11060 केस दर्ज हुए जिनमें से 935 केस फर्जी निकले अर्थात लगभग 10% और 2015 में लगभग 15% केस फर्जी पाए गये थे

SC ST Act, 1989 में सुप्रीम कोर्ट ने किए बदलाव -

  • SC ST Act, 1989 के मामलो की जाँच डिप्टी SP रैंक के अधिकारी करेंगे पहले इन मामलो की जाँच इंस्पेक्टर करता था
  • SC ST Act, 1989 के तहत किसी भी सरकारी अधिकारी को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया जाएगा
  • SC ST Act, 1989 के तहत किसी आम आदमी को भी तुरंत पकड़ा नहीं जाएगा उसको गिरफ्तार करने के लिए SP या SSP रैंक के अधिकारी से अनुमति लेनी होगी
  • SC ST Act, 1989 के तहत किसी भी व्यक्ति को अग्रिम जमानत दी जा सकती है और जमानत देने के अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होगा पहले केवल हाई कोर्ट ही जमानत दे सकता था
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